Monday, June 1, 2026

Khali Mukh

 যে লড়ছে, সে হেরে যেতে পারে।

কিন্তু যে লড়ছে না,
সে অনেক আগেই হেরে বসে আছে—
সমাজের কাছে,
নিজের কাছে,
আর রাতের নিভৃত আয়নার সামনে।
সেখানে আলো কম থাকে,
অজুহাতের শব্দও থেমে যায়।
শুধু দেখা যায়
একটা খালি মুখ—
যার চোখে আর প্রতিরোধ নেই,
ঠোঁটে নেই কোনো স্বীকারোক্তি,
শুধু নীরব পরাজয়ের ধুলো জমে থাকে।


The one who fights may lose.
But the one who does not fight
has already surrendered—
to society,
to oneself,
and to the silent mirror of the night.

There, the light is dim,
even the noise of excuses falls quiet.
What remains is only
a vacant face—
with no resistance left in its eyes,
no confession upon its lips,
only the dust of silent defeat settling over it.

Saturday, May 23, 2026

হতে পারি

হতে পারি সত্যি হয়ে যাওয়া জানলা, 

যার আছে অজস্র ডাল পালা , 

বদলায় না সেই সত্যি টুকু আর ,

হাওয়ার ব্যকরণ শুধুই তোমার বদলাবার,

হতে পারি শেষ না হওয়া রাস্তা

জীবনটা কে বুঝিয়ে বলে "খাস না বাকওয়াস" তা 

হতে পারি শহুরে এয়ার কন্ডিশন 

তাপের মাঝে ঠাণ্ডা ভীষণ 

সেই ঠান্ডায় গরমকালে 

আলগা রোদের সেই বিকেলে 

হতে পারি টগবগে ফিটন গাড়ি 

নতুন বউয়ের লাল বেনারসী শাড়ি 

লাল কপালে সিদুর খেলায় 

হতে পারি আমার কেতায় 

এক অন্য দিনের স্বপ্ন 

রুক্ষ মাঠে ধান বোনার রত্ন 

হতে পারি সেই রত্নের কোষাগার 

জগৎ জুড়ে আদরের খামার

হতে পারি আতঙ্ক থামিয়ে দেওয়ার সেই আদর 

সমস্ত জঙ্গি শহীদের আর নেই কোনো কদর 

হতে পারি এক সেই পৃথিবী

যেখানে মানুষ রাজা মানুষ কবি।





Anandajit Goswami , Anandajit Goswami , Anandajit Goswami 

23rd May, 2026

Tuesday, May 19, 2026

চেনা অচেনা

 যে আমাকে চেনে না, 

আমি তাকেই চিনেছি, 

যে আমাকে বলেছে যে পশুকে মেরোনা, 

আমি পশুর অরণ্যে তাঁকে খুঁজেছি,

 যে আমাকে ভুলে গেছে, 

আমি তাকেই তুলে রেখেছি আমার মনের ঝাঁঝরি পুকুরের সিন্দুকে, 

যে আমাকে ভুল বুঝেছে, 

আমি মনে মনে তাঁকে বুঝিয়েছি, 

যে চলে গেছে, আমি ছল করে তারই সঙ্গে থেকেছি।


The one who does not know me,

it is them whom I have known.


The one who told me, “Do not kill the animal,”

I searched for them within the forest of beasts.


The one who has forgotten me,

it is them whom I have preserved

inside the chest of my mind’s trembling pond.


The one who misunderstood me,

silently, within myself,

I kept explaining myself to them.


The one who has gone away,

through quiet deception,

I have continued to remain with them.


20th May, 2026


Dedicated to @sunil ganguly and his poems


Anandajit Goswami Anandajit Goswami Anandajit Goswami @highlight

Friday, April 24, 2026

राम मनोहर लोहिया और 5 मिनिट



Ram Manohar Lohia ने कहा था—
कील ठोक लो,
झंडा गाड़ लो,
ताकि समाज और नीचे न गिरे।

आज तकनीक उठने की कोशिश में है,
पर हर दिन के आख़िरी बीस मिनट पर
आकर गिर जाती है।

सिनेमा ने डराकर बताया—
ये बीस मिनट
किसी दिन पाँच मिनट भी हो सकते हैं,
और उम्र भी गिरते-गिरते
एक वयस्क से
स्कूल के बच्चे तक सिमट सकती है।

गिरावट जारी है।

अर्थशास्त्र में,
सरकार और समाज ने
द्वितीय विश्व युद्ध के समय
आर्थिक पतन को रोकने के लिए
कई प्रयास किए थे।
उन प्रयासों में लोहिया की कविता नहीं थी—
पर आज,
जब आँकड़े बीस मिनट तक गिर चुके हैं,
और पाँच मिनट तक सिमटने का खतरा है,
शायद
लोहिया की कविता की ज़रूरत है।

क्या कविता
अस्सी को गिरा सकती है?
क्या वह बीस मिनट को
एक मधुर सामाजिक राह बना सकती है—
जिस पर हम सब
साथ-साथ उतर सकें,
और बीस से कई वर्षों की प्रतीक्षा को
एक दिशा दे सकें?

हर बीस मिनट में
जो अन्याय होता है—
घर में, रास्तों में,
समाज के हर कोने में—
उसे चाहिए एक दृष्टिकोण,
एक नुकीली कील-सा विचार,
जैसा लोहिया ने दिया था।

शायद तब
बीस मिनट की ट्रोलिंग भी थम जाएगी,
और समाज

Thursday, April 23, 2026

धुवां की ऋण

रुवा-रुवा सा कच्चा धुआँ,

ज़िंदगी की भीनी-भीनी जीवा।

हार में छिपी जीत का ऋण,

कितने तारे होकर गए संगीन।


दूर से देखो तो एक अद्भुत दौर है,

जिसका हर आरंभ अपने अंत की ओर है।

अंत के ऊपर ही तो जीवन ठहरता है—

या शायद आरंभ और अंत के बीच ही बिखरता है।


गिरने से पहले टिमटिमाते तारे,

खामोशी में ही टूटकर बिखर जाते हैं।

हम चाँद से उन्हें देख भी नहीं पाते—

बस अंधेरे में उनके निशान रह जाते हैं।


क्या कभी चाँद भी पृथ्वी पर गिरता है?

या केवल उसकी छाया ही ग्रहण बन जाती है?

तो क्या हर गिरावट एक ग्रहण है—

रोशनी के क्षण भर के खो जाने का दर्पण है?


इसी तरह क्या Berlin Wall भी गिरी थी—

ईंटों में नहीं, इतिहास के सीने पर?

अगर किसी को इसका उत्तर मिले,

तो ज़रा हमें भी बता देना इस सफ़र पर।

Wednesday, April 22, 2026

आकाश, पानी, और बरसात

Dedicated to Tanmay, Blooming Tanman Birthday today - आकाश, पानी और बरसात


आकाश ठीक कितना बडा होता हैं 


जितना होना चाहिए़ 

ऐसे नहीं होता


पानी आकाश में नहीं होकर 


भी गिरता रहता है


बारिश मै नहीं गिरता 


क्योंकि बारिश तो 


आंसू के साथ आंख में 


मिलता है


और फिर गहरा होता है एकसाथ 


पर समुंदर नहीं बन पता 


समुंदर कितना गहरा होता हैं 


जितना होना चाहिए 


उतना नहीं 


इस लिए तो प्लास्टिक और कुछुआ 


एकसाथ सांस फूलाते हुए


समुंदर के ऊपर आके


घर ढूंढते है


घर कितना बडा होता हैं 


उतना नहीं जो मकान को बदल दे


पर फिर भी घर और मकान शहर मैं बनते है 


क्योंकि उसमें काम करने वाली 


मां को, रात में , आपनी बेटी को 


खाना जो देना पड़ता है

Monday, April 20, 2026

अमेजन और hormuz का इंतजार

 टुकड़े हुए सारे मुस्कुराहटो 

के खोज में जब सोचा अमेज़न हो 

तो अमेजोन के ऑनलाइन शॉपिंग में 

ऑर्डर देने के लिए 

फोन को बार बार दबा ने पर 

अमेजन app रोक के बोलने लगा 

के झूठ, घबराहट का स्टॉक तो जारी है अमेजन पे 

परंतु मुस्कुराहट का सुकून बहुत दिन से आउट ऑफ स्टॉक है 

सुनने मैं आया है के वो स्टॉक hormuz strait मैं ही अटका हुआ है

बहुत जल्दी वो सामान आने के बाद 

सुकून, राहत, दर्द के दवाई अमेजन पे भी उपलब्ध होंगे 

तब तक इंतजार सब से बड़ा राहत है 

इंसानियत के लिए।


आनंदजीत गोस्वामी, 20th April , 2026 - Poetry on Peace and Sustainability